फ़ोन को कैलिब्रेट करें, उसे समतल और धातु से दूर रखें, और घर के भीतर खड़े होकर बाहर की ओर देखते हुए मुख्य द्वार का मुख पढ़ें। फिर घर के केंद्र, यानी ब्रह्मस्थान, पर खड़े होकर हर कमरे का अंश लें। हर पाठ्यांक तब तक दोहराएँ जब तक दो पाठ्यांक एक-दो अंश के भीतर न मिल जाएँ, और यह लिख लें कि आपने चुंबकीय उत्तर लिया या वास्तविक उत्तर।
किन चीज़ों की ज़रूरत है
कम्पास सेंसर वाला फ़ोन, उसके ब्राउज़र में खुला लाइव कम्पास, कागज़ पर घर का मोटा नक्शा और एक पेंसिल। जब कोई पाठ्यांक सीमा के पास आए, तब दूसरी जाँच के लिए साधारण कम्पास काम आता है। यह टूल केवल आपके फ़ोन का अपना सेंसर पढ़ता है; कुछ भी अपलोड नहीं होता।
पहला चरण: फ़ोन को कैलिब्रेट करें
फ़ोन का कम्पास एक छोटा मैग्नेटोमीटर है। समय के साथ उसका पाठ खिसकता है, इसलिए उसे बीच-बीच में कैलिब्रेट करना पड़ता है।
- एंड्रॉयड पर Google Maps में नीले लोकेशन बिंदु से कैलिब्रेशन की स्क्रीन खुलती है; सामान्य तरीका है फ़ोन को धीरे-धीरे आठ के अंक की तरह कुछ बार घुमाना।
- iPhone पर कम्पास कैलिब्रेशन का स्विच Location Services के भीतर System Services की सूची में होता है। iOS के संस्करण के साथ मेनू का रास्ता बदलता रहता है, इसलिए पुराने स्क्रीनशॉट के भरोसे न रहें, स्विच को स्वयं खोजें।
- शुरू करने से पहले चुंबक वाला कवर, रिंग होल्डर या माउंट प्लेट हटा दें।
लाइव कम्पास का पृष्ठ भी यही कहता है: डिवाइस माँगे तो फ़ोन को एक बार आठ के अंक की तरह घुमाएँ। फ्रिज या स्टील की अलमारी के पास कैलिब्रेट करने से बचें। उसकी जगह कमरे के खुले हिस्से में कैलिब्रेट करें, फिर उस स्थान पर जाएँ जहाँ नापना है।
दूसरा चरण: धातु और इलेक्ट्रॉनिक सामान से दूरी
पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र कमज़ोर होता है, और पास रखा स्टील या चुंबक सेंसर को भटका देता है। भारतीय घरों में आम कारण हैं: स्टील की अलमारी, फ्रिज, स्पीकर, इन्वर्टर और उसकी बैटरी, बिजली के पैनल, स्टील की ग्रिल और चौखट, और प्रवेश के पास खड़ी कार या स्कूटर। खंभों और छत की स्लैब में भी सरिया होता है।
हस्तक्षेप है या नहीं, यह एक सरल जाँच से पता चलता है: एक पाठ्यांक लें, फ़ोन की दिशा वैसी ही रखते हुए एक कदम बगल में हटें, और फिर पढ़ें। यदि अंक दो-तीन अंश से अधिक उछलता है, तो पास में कुछ उसे बिगाड़ रहा है। ऐसे में पहला अंक मान लेने से बचें। उसकी जगह कुछ कदम हटें, फिर से कैलिब्रेट करें, और वही पाठ्यांक रखें जो बार-बार आए।
तीसरा चरण: मुख्य द्वार पढ़ें
हर वास्तु आकलन इसी पाठ्यांक से शुरू होता है।
- घर के भीतर, मुख्य द्वार पर, बाहर की ओर मुँह करके खड़े हों।
- फ़ोन को थाली की तरह समतल पकड़ें, उसका ऊपरी किनारा द्वार से सीधा बाहर की ओर, द्वार के समकोण पर।
- अंक स्थिर होने तक रुकें, फिर लिखें।
- दो बार और पढ़ें। यदि तीनों पाठ्यांक एक-दो अंश के भीतर मिलते हैं, तो वही आपका मुख है।
यदि द्वार की चौखट स्टील की है या सामने ग्रिल है, तो उसी सीध में एक-दो कदम भीतर आकर फिर पढ़ें। यह अंश लाइव कम्पास में डालें। वह आठ में से दिशा, सोलह में से ज़ोन और बत्तीस में से द्वार बताता है, और VastuMaster के बाकी सभी टूल यही जानकारी लेते हैं।
चौथा चरण: चुंबकीय उत्तर या वास्तविक उत्तर
कम्पास की सुई चुंबकीय उत्तर की ओर इशारा करती है। वास्तविक उत्तर भौगोलिक ध्रुव है। आपके स्थान पर इन दोनों के बीच का कोण चुंबकीय दिक्पात कहलाता है।
शास्त्रीय ग्रंथों में चुंबकीय कम्पास का प्रयोग नहीं है। मानसार और मयमत समतल भूमि पर बने वृत्त के केंद्र में शंकु गाड़कर पूर्व-पश्चिम निकालते हैं: सुबह और दोपहर बाद की छाया के सिरे वृत्त पर दो बिंदु बनाते हैं, और उन्हें मिलाने वाली रेखा पूर्व-पश्चिम देती है। मानसार इस रेखा में ऋतु के अनुसार एक छोटा संशोधन भी जोड़ता है। इस विधि से मिली दिशाएँ खगोलीय हैं, यानी वास्तविक दिशाएँ।
भारत में यह अंतर छोटा है। ब्रिटिश जियोलॉजिकल सर्वे के कैलकुलेटर पर World Magnetic Model 2025 से अक्टूबर 2026 के लिए दिक्पात इस प्रकार आता है: दिल्ली में लगभग 1.3 अंश पूर्व, मुंबई में लगभग शून्य, कोलकाता और गुवाहाटी में लगभग 0.3 अंश पश्चिम, और चेन्नई तथा बेंगलुरु में लगभग 1.1 अंश पश्चिम। दिक्पात वर्षों में धीरे-धीरे बदलता है, इसलिए अपने शहर का वर्तमान मान जाँच लें।
लाइव कम्पास का डिफ़ॉल्ट चुंबकीय उत्तर है, यानी कम्पास का पाठ जैसा है वैसा; VastuMaster पर प्रयुक्त Vastu Chakra पद्धति की यही परिपाटी है। यदि आप वास्तविक दिशाओं से काम करना चाहते हैं, तो "true" चुनें और अपना दिक्पात भरें, पूर्व को धनात्मक और पश्चिम को ऋणात्मक लिखकर।
एक ही घर में आधे रास्ते संदर्भ बदलने से बचें। उसकी जगह एक संदर्भ चुनें, उसे अपनी तालिका के ऊपर लिख दें, और हर पाठ्यांक में वही रखें। एक-आध अंश का अंतर केवल सीमा के पास मायने रखता है: ज़ोन हर 22.5 अंश पर बदलते हैं और द्वार हर 11.25 अंश पर।
पाँचवाँ चरण: केंद्र, यानी ब्रह्मस्थान, निकालें
मानसार हर भूमि-योजना के बीच के पदों में ब्रह्मा को स्थान देता है, और कमरों के पाठ्यांक घर के इसी केंद्र से लिए जाते हैं।
आयताकार नक्शे में केंद्र वहाँ है जहाँ दोनों विकर्ण कटते हैं। L-आकार या अनियमित नक्शे में विद्वानों के तरीके अलग हैं: कुछ नक्शे को पूरा करके आयत बनाते हैं, कुछ नक्शे के क्षेत्रफल का संतुलन-बिंदु निकालते हैं। दोनों बाद का व्यवहार हैं, और ऊपर बताए ग्रंथों में मुझे इनमें से कोई भी विधि लिखी नहीं मिली। अलग-अलग कमरों के लिए अलग-अलग विधि अपनाने से बचें। उसकी जगह एक विधि चुनें, नक्शे पर केंद्र अंकित करें, और लिख दें कि कौन-सी विधि अपनाई, ताकि जाँचने वाला उसे दोहरा सके।
छठा चरण: केंद्र से हर कमरा पढ़ें
इसके दो तरीके हैं, और दूसरा अधिक भरोसेमंद है।
सीधी विधि। केंद्र पर खड़े हों, फ़ोन समतल रखें, और तब तक घूमें जब तक उसका ऊपरी किनारा कमरे के बीच की ओर न हो जाए। अंश लिखें, फिर हर कमरे के लिए यही दोहराएँ।
नक्शा विधि। किसी साफ़ स्थान, जैसे खुली बालकनी या अहाते के गेट पर, एक अच्छा उत्तर पाठ्यांक लें और वह उत्तर रेखा अपने नक्शे पर खींच दें। फिर केंद्र से चाँदे (प्रोट्रैक्टर) की सहायता से सोलह खंड बनाएँ: उत्तर ज़ोन 348.75 से 11.25 अंश तक है, और आगे का हर ज़ोन 22.5 अंश चौड़ा है। अब हर कमरा नक्शे से पढ़ें।
फ्लैट का केंद्र अक्सर सरिये से भरी स्लैब के नीचे और बिजली की तारों के पास होता है, इसलिए वहाँ के पाठ्यांक भटक सकते हैं। यदि सीधी विधि के अंक नक्शे के आकार से मेल नहीं खाते, तो नक्शा विधि को प्राथमिकता दें। अपनी इमारत का उत्तर-ऊपर वाला उपग्रह नक्शा भी अच्छी जाँच है, क्योंकि मानचित्र वास्तविक उत्तर के अनुसार बनते हैं।
सातवाँ चरण: रिकॉर्ड रखें
एक छोटी तालिका बाद की बहुत-सी उलझन बचा देती है।
| स्थान | पाठ्यांक 1 | पाठ्यांक 2 | कौन-सा उत्तर | दिशा (8) | ज़ोन (16) | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|---|
| मुख्य द्वार | ||||||
| रसोई | ||||||
| शयनकक्ष |
समझाने के लिए एक काल्पनिक उदाहरण लीजिए। मान लें कोई द्वार पहले 101 अंश और फिर 102 अंश पढ़ता है। लाइव कम्पास 101 अंश को E ज़ोन में और 102 अंश को ESE ज़ोन में रखता है, क्योंकि दोनों के बीच की सीमा 101.25 अंश पर है। यह द्वार सीमा पर है। दोनों पाठ्यांक लिखें, एक कदम और भीतर से तीसरा पाठ्यांक लें, और यदि वह भी सीमा पर ही रहे, तो साधारण कम्पास से जाँच करवाएँ।
आम भूलें, और उनकी जगह क्या करें
- बाहर खड़े होकर द्वार की ओर देखते हुए पढ़ने से बचें। उसकी जगह भीतर खड़े होकर बाहर की ओर देखें, जैसा लाइव कम्पास बताता है।
- फ़ोन को कैमरे की तरह सीधा खड़ा पकड़ने से बचें। उसकी जगह उसे थाली की तरह समतल रखें।
- खड़ी कार, स्टील के गेट या फ्रिज के पास नापने से बचें। उसकी जगह कुछ कदम हटकर दोहराएँ।
- एक ही अंक पर भरोसा करने से बचें। उसकी जगह कम से कम दो पाठ्यांक लें और वही रखें जो दोहराया जाए।
- एक ही घर में चुंबकीय और वास्तविक उत्तर मिलाने से बचें। उसकी जगह एक संदर्भ चुनें और उसे लिख लें।
सारे पाठ्यांक लिख लेने के बाद हर एक को लाइव कम्पास में डालकर उसका ज़ोन और द्वार देखें। बाकी टूल टूल पृष्ठ पर हैं, और साइट शास्त्रीय नियमों की गणना कैसे करती है, यह परिचय पृष्ठ पर बताया गया है।